कलयुग के संतापों का एकमात्र समाधान है 'आंतरिक रामराज्य' : डॉ. सर्वेश्वर जी दूसरे दिवस में होगी 'श्री राम जन्मोत्सव' की धूम

कलयुग के संतापों का एकमात्र समाधान है 'आंतरिक रामराज्य' : डॉ. सर्वेश्वर जी दूसरे दिवस में होगी 'श्री राम जन्मोत्सव' की धूम

हापुड़: News Flash INDIA: (निशांक शर्मा): हापुड़ के अर्जुन नगर के सामने स्थित स्वर्ग आश्रम रोड मैदान में रविवार को एक नए आध्यात्मिक युग का सूत्रपात हुआ। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (DJJS) द्वारा आयोजित सात दिवसीय भव्य 'श्री राम कथा ज्ञान यज्ञ' के प्रथम दिन हज़ारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे क्षेत्र को राममय कर दिया। भक्ति, वैराग्य और निष्काम प्रेम की इस त्रिवेणी में गोता लगाने के लिए पहले ही दिन से हापुड़ और आसपास के क्षेत्रों से भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

वैश्विक पटल पर राम: 300 से अधिक रामायण इसके प्रमाण

​दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य एवं कथाव्यास डॉ. सर्वेश्वर जी ने प्रथम दिन 'कथा माहात्म्य' का अत्यंत तार्किक और मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि त्रेतायुग से लेकर आज के डिजिटल युग तक प्रभु श्री राम संपूर्ण विश्व के लिए मर्यादा, सुशासन और आदर्श के सबसे बड़े प्रतीक हैं।

​व्यासपीठ ने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक तथ्यों को सामने रखते हुए कहा:

​"श्री राम की स्वीकार्यता केवल भारत तक सीमित नहीं है। आज विश्वभर में 300 से अधिक रामायणों के प्रामाणिक साक्ष्य उपलब्ध हैं। विदेशों में गूंजती रामधुन इस बात का जीवंत प्रमाण है कि राम नाम की महिमा मानव मात्र के कल्याण के लिए है।"

आधुनिकता की अंधी दौड़ और बिखरते परिवार

​वर्तमान सामाजिक परिदृश्य पर प्रहार करते हुए डॉ. सर्वेश्वर जी ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य आधुनिकता की अंधी दौड़ में इतना अंधा हो चुका है कि वह अपने मूल संस्कारों—दया, त्याग, करुणा और सौहार्द—से दूर होता जा रहा है। आज मानवीय रिश्ते स्वार्थ की वेदी पर चढ़ रहे हैं और संयुक्त परिवारों का आपसी प्रेम व सम्मान समाप्त हो रहा है। ऐसे संक्रमण काल में समाज को पतन से बचाने के लिए प्रभु श्री राम के आदर्शों को जीवन में उतारना बेहद जरूरी है।

ब्रह्मज्ञान से ही संभव है वास्तविक 'रामराज्य'

​कथाव्यास ने अध्यात्म के गूढ़ रहस्य को खोलते हुए स्पष्ट किया कि केवल ऐतिहासिक कथा सुन लेने या नारों से समाज नहीं बदलेगा। इसका एकमात्र वैज्ञानिक और आध्यात्मिक मार्ग 'ब्रह्मज्ञान' है। जब मनुष्य पूर्ण सतगुरु के माध्यम से अपने भीतर दिव्य दृष्टि प्राप्त करता है, तब वह अपने भीतर स्थित 'सनातन रामतत्व' का साक्षात्कार कर पाता है। जब तक हर व्यक्ति के भीतर का राम नहीं जागेगा, तब तक समाज में आदर्श रामराज्य की स्थापना असंभव है।

भजन-संकीर्तन पर झूमे श्रद्धालु, पंडाल हुआ भावविभोर

​कथा के दौरान संस्थान के संगीतकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए दिव्य और सुमधुर भजनों ने पूरे वातावरण को अलौकिक आनंद से भर दिया। मधुर धुनों और राम नाम के जयकारों से पूरा पंडाल झूम उठा, जिससे हर भक्त के हृदय में प्रेम और सद्भाव का संचार हुआ।

शहर की प्रबुद्ध हस्तियों ने की शिरकत

​इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में संस्थान की प्रतिनिधि साध्वी श्वेता भारती जी एवं साध्वी वसुधा भारती जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। इसके साथ ही हापुड़ शहर के अनेक प्रतिष्ठित समाजसेवियों और गणमान्य अतिथियों ने व्यासपीठ का पूजन कर आशीर्वाद लिया, जिनमें मुख्य रूप से शामिल रहे:

  • ​श्रीमान सुधांशु माहेश्वरी जी एवं श्रीमती प्रीति माहेश्वरी जी
  • ​श्रीमान दीपक अग्रवाल जी एवं श्रीमती नीरू अग्रवाल जी
  • ​श्रीमान अरुण अग्रवाल जी एवं श्रीमती रचना अग्रवाल जी
  • ​श्रीमान कोमल शर्मा जी एवं श्रीमती कांता शर्मा जी

​कार्यक्रम का समापन प्रभु श्री राम की पावन महाआरती और दिव्य महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ।

कल मनेगा 'श्री राम जन्मोत्सव'

​संस्थान के प्रबंधकों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कथा के दूसरे दिन यानी सोमवार को 'प्रभु श्री राम जन्मोत्सव' का पावन प्रसंग अत्यंत धूमधाम और अलौकिक झांकियों के साथ मनाया जाएगा। संस्थान ने हापुड़ और आसपास के सभी श्रद्धालुओं से सपरिवार समय पर पहुंचकर इस दिव्य रसपान का लाभ उठाने की अपील की है।