इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटा, सजा निलंबित कर दी राहत

सजा को निलंबित करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राज बीर सिंह ने....

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटा, सजा निलंबित कर दी राहत

ब्यूरो रिपोर्ट -  News Flash INDIA- प्रयागराज :इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गाजीपुर जिले के एक पुराने मारपीट मामले में निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए तीन व्यक्तियों की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें बड़ी राहत दी है। न्यायालय ने अपील स्वीकार करते हुए दोषियों की सजा को निलंबित (Suspension of Sentence) कर दिया है और उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया है।

क्या है पूरा मामला?

​यह मामला गाजीपुर जिले के थाना जमनिया से संबंधित है, जो वर्ष 2008 में दर्ज किया गया था (केस अपराध संख्या 641/2008)। इस मामले में रविंद्र यादव, हरिहर यादव और खरचू यादव के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। निचली अदालत (ST No. 312/2011) ने सुनवाई के बाद इन तीनों को आईपीसी की धारा 308/34 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास), 323, 325, 427, 504 और 506 के तहत दोषी पाया था। अदालत ने उन्हें अधिकतम तीन साल के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट में दी गई दलीलें

​दोषियों की ओर से अधिवक्ता रूपेश कुमार सिंह ने माननीय न्यायमूर्ति राज बीर सिंह की अदालत में तर्क दिया कि:

  • ​ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों का सही ढंग से अवलोकन नहीं किया है और दोषियों के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत मौजूद नहीं हैं।

  • ​घायल व्यक्ति के बयान और अन्य गवाहों की बातों में काफी विरोधाभास है।

  • ​मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, घायल को लगी चोटें ऐसी नहीं थीं जो जीवन के लिए घातक (Dangerous to life) मानी जाएं।

  • ​अपीलकर्ता ट्रायल के दौरान भी जमानत पर थे और उन्होंने कभी कानून का उल्लंघन नहीं किया।

अधिवक्ता रूपेश कुमार सिंह की भूमिका

इस मामले में अपीलकर्ताओं रविंद्र यादव एवं अन्य का पक्ष अधिवक्ता रूपेश कुमार सिंह ने प्रभावी ढंग से रखा। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष तर्क दिया कि निचली अदालत ने साक्ष्यों का सही ढंग से आकलन नहीं किया है। रूपेश कुमार सिंह ने घायल व्यक्ति और अन्य गवाहों के बयानों में मौजूद विरोधाभासों और कमियों को उजागर किया। उन्होंने विशेष रूप से यह दलील दी कि घायल को लगी चोटें ऐसी नहीं थीं जो जीवन के लिए घातक मानी जाएं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने न्यायालय का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि अपील के निस्तारण में लगने वाले संभावित समय को देखते हुए दोषियों को जमानत मिलना न्यायसंगत है, जिसके आधार पर अंततः कोर्ट ने सजा निलंबित करने का आदेश दिया। 

अदालत का निर्णय

​सरकारी वकील (A.G.A.) ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि दोषसिद्धि साक्ष्यों पर आधारित है। हालांकि, हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि अपील पर अंतिम सुनवाई में लंबा समय लग सकता है।

​न्यायालय ने आदेश दिया कि तीनों अपीलकर्ताओं को संबंधित निचली अदालत की संतुष्टि पर व्यक्तिगत बंध पत्र (Personal Bond) और दो जमानतदार (जिनमें से एक परिवार का सदस्य हो) पेश करने पर जमानत पर रिहा किया जाए।

केस प्रोफाइल

  • अपील संख्या: 3543 / 2026
  • अपीलकर्ता: रविंद्र यादव, हरिहर यादव और खरचू यादव
  • संबंधित थाना: जमनिया, जिला गाजीपुर
  • आदेश तिथि: 8 अप्रैल, 2026
  • अदालत: न्यायमूर्ति राज बीर सिंह, इलाहाबाद हाईकोर्ट

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