जिलाधिकारी के नाम पर भ्रम जाल की साजिश....? फर्जीवाड़े के मामले में आरोपियों को बचाने के लिए हापुड़ डीएम के नाम पर भ्रम फैला रहे सीएमओ ?
हापुड़ के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा उत्तराखंड के सरकारी कर्मचारियों के उस मृत्यु प्रमाण पत्र को गलत व फर्जी मानते हुए निरस्त करना पड़ा, जो स्वास्थ्य विभाग की एक आशा मीना वर्मा द्वारा आपराधिक साजिश रचकर हापुड़ नगर पालिका के अधिकारियों से साज करके जारी करवा लिया गया था। प्रमाण पत्र के निरस्तीकरण होने के बाद भी अब तक इस षड्यंत्र की सूत्रधार आरोपी मीना वर्मा पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किया जाना बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
- क्या आरोपियों को बचाने के लिए हापुड़ डीएम के नाम पर भ्रम फैला रहे सीएमओ हापुड़ ?
- फर्जी प्रमाणपत्र हुआ निरस्त, पर न्याय व्यवस्था पस्त
रिपोर्ट : ब्यूरो / निशांक शर्मा - (News Flash INDIA) : यूपी के जनपद हापुड़ का नाम दो राज्यों के बीच कुछ माह से विवाद का विषय बना हुआ है। जिसके चलते प्रदेश और जनपद हापुड़ की छवि दूसरे पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में पहले ही एक फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र के बनाने के मामले में दागदार हो चुकी हैं जिसमें कानूनी प्रक्रिया शुरू होने के बाद, हापुड़ के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा उत्तराखंड के सरकारी कर्मचारियों के उस मृत्यु प्रमाण पत्र को गलत व फर्जी मानते हुए निरस्त करना पड़ा, जो स्वास्थ्य विभाग की एक आशा मीना वर्मा द्वारा आपराधिक साजिश रचकर हापुड़ नगर पालिका के अधिकारियों से साज करके जारी करवा लिया गया था।
- प्रमाण पत्र के निरस्तीकरण होने के बाद भी अब तक इस षड्यंत्र की सूत्रधार आरोपी मीना वर्मा पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किया जाना बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

- इस संबंध में जब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से बात की गई तो पहले उन्होंने इस अति गंभीर विषय के संज्ञान में न होने की बात कही, जबकि इस मामले में हापुड़ कोर्ट के आदेश पर 6 अधिकारियों सहित 14 लोगों के खिलाफ 9 दिसंबर को हापुड़ कोतवाली पुलिस ने FIR दर्ज की थी।
तो वहीं ,अब स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर सुनील कुमार त्यागी का ऐसा बयान आया है। जिसने अब हापुड़ के लोकप्रिय व निष्पक्षता से न्याय करने वाले डीएम अभिषेक पांडेय की निष्पक्ष कार्यशैली को लेकर ही भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। सीएमओ हापुड़ द्वारा दिए गए वक्तव्य ने स्वास्थ्य विभाग की दूषित मंशा को उजागर करते हुए, इस अति गंभीर मामले में उनकी अप्रत्यक्ष भूमिका और न्याय प्रक्रिया को बाधित करने की कार्यशैली को उजागर कर दिया है।

जिस प्रमाण पत्र को फर्जी तथ्यों के आधार पर बनवाने के लिए आरोपी आशा मीना वर्मा द्वारा कई स्थानीय लोगों के साथ-साथ पूरे सरकारी तंत्र से धोखाधड़ी की गई। और फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करवाकर उसका उपयोग सत्य के रूप में करने का प्रयास लगातार किया जा रहा है।
ओर यह सब उस स्थिति में हो रहा है, जबकि नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी द्वारा 12 दिसंबर को लिखित पत्र जारी करते हुए उस प्रमाण पत्र को अवैध और फर्जी मानते हुए निरस्त कर दिया गया है। तब ऐसे में लोगों और सरकारी सिस्टम की आंखों में धूल झोंककर फर्जी तथ्यों के आधार पर प्रमाण पत्र अर्जित करने की आरोपी आशा, मीना वर्मा पर अब तक विभाग द्वारा कोई भी कार्यवाही नहीं किए जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।
जिस आशा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पूरी साजिश की एक- एक कड़ी को रचा । उसको प्राप्त अवैध संरक्षण न्याय प्रक्रिया में बाधा उत्पन्नत करने का ही एक प्रयास है। क्योंकि उक्त प्रमाण पत्र को नगर पालिका द्वारा की गई निरस्तीकरण की कार्यवाही , आरोपी आशा के अपराध को स्वत: सिद्ध करता है। जिसको लेकर हापुड़ नगर कोतवाली पुलिस द्वारा इस मामले को लेकर आरोपी आशा मीना वर्मा सहित 14 आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2) और 61(2) के तहत FIR दर्ज की गई है।
- प्रकरण पर क्या बोले CMO हापुड़
इस मामले में सीएमओ साहब का कहना है कि उनके द्वारा इस मामले को जिलाधिकारी के समक्ष रखा गया था , जिसमें जिला अधिकारी के हवाले से उन्होंने यह बात कही कि उन्हें यह निर्देश दिया गया है कि इस गंभीर प्रकरण में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद ही आरोपी आशा पर कोई भी विभागीय कार्यवाही की जाएगी।
जबकि इसके उलट आरोपी आशा द्वारा किया गया कृत्य पूर्ण रूप से गैरकानूनी और फर्जी सिद्ध हो चुका है। जिसको लेकर नगर पालिका ने जारी किए गए मृत्यु प्रमाण पत्र को निरस्त करने की कार्यवाही करते हुए 12 दिसंबर को ही आदेश जारी कर दिया था।
इसके बाद भी इस अति गंभीर प्रकरण में जनपद हापुड़ और डीएम हापुड़ की छवि को धूमिल करने और दो राज्यों के बीच विवाद का प्रश्न बने इस अति गंभीर प्रकरण में जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली निष्पक्ष जिला अधिकारी और जनपद हापुड़ की छवि को धूमिल करने वाला है।
ऐसी भी आशंका जताई जा रही है कि ऐसे ही कुछ अधिकारियों द्वारा इस मामले में न्याय प्रक्रिया को भी दूषित करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है पीड़ित महिला के अधिवक्ता शिवकुमार अनुसार इन परिस्थितियों के चलते मुकदमे की वादी महिला को धमकाने का प्रयास भी फोन पर किया गया है और ऐसी बातें भी सामने आई है कि इस प्रकरण में कई अन्य लोग और बड़े जिम्मेदारों की गर्दन भी फस रही हैं। जिसके चलते प्रकरण को दबाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
इन तथ्यों में कितनी सच्चाई है यह तो जांच के बाद ही सामने आ पाएगा लेकिन सीएमओ हापुड़ द्वारा जिलाधिकारी के हवाले से दिए गए बयान से हापुड़ जिला अधिकारी के निष्पक्ष और न्याय पूर्ण कार्यशैली को लेकर भ्रम की स्थिति अवश्य उत्पन्न हो रही है।