SC के कड़े दिशा-निर्देशों का हवाला: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हत्या के आरोपी की जमानत अर्जी की खारिज; अधिवक्ता रूपेश कुमार सिंह ने किया कड़ा विरोध

न्यायमूर्ति कृष्ण पहवाल की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के 'X बनाम राजस्थान राज्य (2024)' मामले का संदर्भ देते हुए कहा कि.....

SC के कड़े दिशा-निर्देशों का हवाला: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हत्या के आरोपी की जमानत अर्जी की खारिज; अधिवक्ता रूपेश कुमार सिंह ने किया कड़ा विरोध

Special Report : News Flash INDIA- प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में हत्या के आरोपी शैलेंद्र कुमार सिंह की जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि मामला अब निर्णायक चरण में है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आरोपी पर मुख्य हमलावर होने का गंभीर आरोप है और इस स्तर पर उसे रिहा करना उचित नहीं होगा।

  • घटना का विवरण और आरोप

यह मामला प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) के थाना उतरांव में वर्ष 2021 में दर्ज केस अपराध संख्या 138/2021 से संबंधित है। आरोपी शैलेंद्र कुमार सिंह पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 148, 149, 302 (हत्या), 120-B और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।  

आरोप के अनुसार, शैलेंद्र कुमार सिंह ने मृतक पर लोहे की रॉड से जानलेवा हमला किया था। प्राथमिकी (FIR) में यह भी उल्लेख है कि आरोपी ने शिकायतकर्ता और उसकी बहन पर भी हमला किया था। आरोपी 10 मई 2021 से जेल में बंद है। 

  • अधिवक्ता रूपेश कुमार सिंह की भूमिका

इस मामले की कानूनी लड़ाई में अधिवक्ता रूपेश कुमार सिंह ने शिकायतकर्ता (Informant) के वकील के रूप में प्रभावी भूमिका निभाई। उनकी भूमिका के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:  

कड़ा विरोध: उन्होंने राज्य के अपर शासकीय अधिवक्ता (AGA) के साथ मिलकर जमानत याचिका का पुरजोर विरोध किया।  

पक्ष रखना: उन्होंने न्यायालय के समक्ष आरोपी द्वारा किए गए हमले की गंभीरता और गवाहों के बयानों की स्थिति को प्रभावी ढंग से रखा।  

न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग: वह सुनवाई की विभिन्न तारीखों पर उपस्थित रहे, इस कानूनी प्रक्रिया में अधिवक्ता रूपेश कुमार सिंह ने शिकायतकर्ता (Informant) के वकील के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने सुनवाई के दौरान राज्य के अपर शासकीय अधिवक्ता (AGA) के साथ मिलकर जमानत याचिका का पुरजोर विरोध किया। रूपेश कुमार सिंह ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि मामले की गंभीरता और ट्रायल की वर्तमान स्थिति को देखते हुए आरोपी को राहत नहीं दी जानी चाहिए।

  • न्यायालय का मुख्य अवलोकन

न्यायमूर्ति कृष्ण पहवाल की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के 'X बनाम राजस्थान राज्य (2024)' मामले का संदर्भ देते हुए कहा कि एक बार जब आरोप तय हो जाएं और ट्रायल शुरू हो जाए, तो सामान्यतः जमानत नहीं दी जानी चाहिए। कोर्ट ने पाया कि आरोपी ने मृतक पर लोहे की रॉड से हमला किया था।  

  • अंतिम निर्देश:

न्यायमूर्ति कृष्ण पहवाल ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि जब ट्रायल शुरू हो चुका हो और अंतिम निष्कर्ष की ओर हो, तो सामान्यतः आरोपी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को बिना किसी कानूनी बाधा के मामले का निपटारा शीघ्रता (Expeditiously) से करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए संबंधित ट्रायल कोर्ट को आदेश दिया कि वह इस मामले का निपटारा शीघ्रता (Expeditiously) से करे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जमानत पर की गई टिप्पणियां केवल इस आवेदन के निस्तारण तक सीमित हैं और इसका मुख्य मुकदमे के फैसले पर कोई असर नहीं पड़ेगा।