बुलडोजर की आहट या ब्लैकमेलिंग का खेल? हाईकोर्ट पहुँचा हापुड़ के ML-01 मॉल का मामला

हापुड़ के ML-01 मॉल पर अवैध निर्माण के आरोप और एनआरआई मालिक से ₹50 लाख की रंगदारी का दावा। मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

बुलडोजर की आहट या ब्लैकमेलिंग का खेल? हाईकोर्ट पहुँचा हापुड़ के ML-01 मॉल का मामला

Special Report: News Flash INDIA- हापुड़ : उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में स्थित 'एमएल-01 मॉल' इस समय चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यह मामला सिर्फ एक इमारत का नहीं, बल्कि एक एनआरआई (NRI) निवेशक और एक स्थानीय अधिवक्ता के बीच छिड़ी उस कानूनी जंग का है, जिसमें 'रंगदारी' और 'भ्रष्टाचार' जैसे गंभीर आरोप एक-दूसरे पर मढ़े जा रहे हैं।

    • विवाद का केंद्र: दो पक्ष, दो कहानियाँ

इस विवाद को समझने के लिए हमें इसके दोनों पहलुओं को गहराई से देखना होगा। एक पक्ष 'निवेशक की सुरक्षा' की बात कर रहा है, तो दूसरा 'जनता की सुरक्षा' और 'नियमों के पालन' की।

  • पक्ष 1: एनआरआई निवेशक (उमेश कुमार) का पक्ष

मॉल के मालिक उमेश कुमार का कहना है कि उन्होंने विदेश से आकर अपने देश में करोड़ों का निवेश किया ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार और विकास हो सके।

  1. मुख्य आरोप: उनका दावा है कि अधिवक्ता दीपक चौहान और उनके साथी आरटीआई (RTI) का हथियार बनाकर उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।
  2. रंगदारी का दावा: उमेश कुमार ने आरोप लगाया है कि उनसे 50 लाख रुपये की मांग की गई है और पैसे न देने पर मॉल को बंद कराने या ढहाने की धमकी दी जा रही है।
  3. प्रशासन से गुहार: उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे अपील की है कि यदि ऐसे ही निवेशकों को डराया गया, तो कोई भी एनआरआई भारत लौटने की हिम्मत नहीं करेगा।
  • पक्ष 2: अधिवक्ता (दीपक चौहान) का पक्ष

दूसरी ओर, अधिवक्ता दीपक चौहान का तर्क पूरी तरह से तकनीकी और कानूनी है। उनका कहना है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि 'अवैध निर्माण' के खिलाफ है।

  1. नियमों की अनदेखी: चौहान का आरोप है कि मॉल का निर्माण स्वीकृत मानचित्र (Map) के अनुसार नहीं हुआ है। मॉल में अनिवार्य पार्किंग स्पेस को खत्म कर दिया गया है।
  2. सुरक्षा का खतरा: सबसे गंभीर आरोप अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) को लेकर है। वकील का कहना है कि मॉल में आग लगने की स्थिति में निकास की कोई उचित व्यवस्था नहीं है, जो सैकड़ों जिंदगियों को खतरे में डाल सकता है।
  3. कानूनी प्रक्रिया: उन्होंने बताया कि आवास विकास परिषद ने मॉल को तीन बार नोटिस दिया और 16 दिसंबर 2025 को अंतिम अल्टीमेटम दिया था। कार्रवाई न होने पर उन्होंने 19 जनवरी 2026 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की है।
  • क्या यह 'सिस्टम' की विफलता है?

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल आवास विकास परिषद और अग्निशमन विभाग पर उठता है। यदि मॉल का निर्माण नक्शे के खिलाफ था, तो उसे पूरा होने तक क्यों नहीं रोका गया? और यदि निर्माण सही है, तो एक निवेशक को बार-बार नोटिस देकर और अदालती चक्करों में क्यों उलझाया जा रहा है?

अधिवक्ता चौहान का यह कहना कि वे मॉल मालिक से कभी मिले ही नहीं, उमेश कुमार के 'रंगदारी' वाले आरोपों को और अधिक पेचीदा बना देता है। अब यह जांच का विषय है कि क्या वास्तव में रंगदारी मांगी गई थी या यह कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए लगाया गया एक रक्षात्मक आरोप है।

  • क्या चलेगा बुलडोजर?

उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माणों पर 'बुलडोजर' की कार्रवाई की नजीरें अक्सर देखने को मिलती हैं। यदि हाईकोर्ट में यह सिद्ध हो जाता है कि मॉल का निर्माण वास्तव में जन सुरक्षा मानकों और स्वीकृत नक्शे के विपरीत है, तो ML-01 मॉल पर बुलडोजर की आहट हकीकत में बदल सकती है। वहीं, यदि रंगदारी के आरोप सच साबित हुए, तो शिकायतकर्ताओं पर कानून का शिकंजा कसना तय है। फिलहाल यह मामला उच्च न्यायालय के अधीन है।