हापुड़ पुलिस की 'तालिबानी' कार्यशैली: हाईकोर्ट के स्टे पर भारी पड़ी बाबूगढ़ थाने की 'हथकड़ी', कोर्ट ने लगाई फटकार , DIG मेरठ ने दिए जांच के आदेश
High Court Stay Order violation by Hapur Police DIG Meerut Kalanidhi Naithani investigation order हापुड़ के बाबूगढ़ थाने में हाईकोर्ट के स्टे आदेश के बावजूद गिरफ्तारी का मामला। जानिए कैसे पुलिस की कार्रवाई कानूनी आदेश पर भारी पड़ी और क्या है पूरा विवाद।"
- High Court Stay Order violation by Hapur Police
- DIG Meerut Kalanidhi Naithani investigation order
- Illegal detention and handcuffing in Hapur
ब्यूरो रिपोर्ट : News Flash INDIA- उत्तर प्रदेश की 'हाईटेक' पुलिस अपनी कार्यशैली के लिए अक्सर चर्चा में रहती है, लेकिन जनपद हापुड़ के बाबूगढ़ थाने ने तो 'कीर्तिमान' ही स्थापित कर दिया है। यहाँ पुलिस ने साबित कर दिया कि उनके लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का 'स्टे ऑर्डर' रद्दी के टुकड़े से ज्यादा कुछ नहीं है।
मामला एक ऐसे व्यक्ति का है, जिसे माननीय उच्च न्यायालय ने गिरफ्तारी से संरक्षण (Stay) दे रखा था, लेकिन बाबूगढ़ पुलिस ने अपनी 'तालिबानी' प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए न केवल उसे अवैध हिरासत में लिया, बल्कि सरेराह हथकड़ी लगाकर उसका 'विजय जुलूस' भी निकाला।
- बाबूगढ़ थाना पुलिस ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों को न केवल ठेंगे पर रखा, बल्कि एक सम्मानित नागरिक को 'तालिबानी' अंदाज में हथकड़ी लगाकर सरेराह अपमानित भी किया।
- अब इस मामले में पीड़ित ने मेरठ रेंज के डीआईजी कलानिधि नैथानी से गुहार लगाई । पीड़ित के अनुसार मेरठ रेंज के डीआईजी ने जांच के आदेश देकर दोषी पुलिसकर्मियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

हाईकोर्ट का 'सुरक्षा कवच' बनाम पुलिस की 'जिद'
पूरा मामला पीड़ित अनिल कुमार उर्फ टीनी से जुड़ा है, जिन पर एक संपत्ति विवाद को लेकर कोर्ट के आदेश पर कथित धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 28 मई 2025 को आदेश पारित करते हुए अनिल कुमार की गिरफ्तारी पर अगली सुनवाई तक रोक (Stay on Arrest) लगा दी थी। पीड़ित के अनुसार इस प्रकरण की जांच कर रहे बाबूगढ़ थाना के दारोगा गौरव कुमार ने उनसे संपर्क किया था और उनके घर भी पहुंचे थे । साथ ही दरोगा गौरव ने उनको अगले दिन 16 मार्च 2026 को विवेचना में सहयोग करने के लिए बाबूगढ़ थाने आने के लिए भी कहा था जब पीड़ित विवेचना में सहयोग करने थाने पहुँचा, तो पुलिस ने उस 'स्टे ऑर्डर' को रद्दी का टुकड़ा समझकर किनारे कर दिया। पीड़ित का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने कहा, "हम हाईकोर्ट के आदेश को नहीं मानते, हमारे पास ऊपर से दबाव है।"
प्रेस नोट जारी कर निकाला 'विजय जुलूस', कोर्ट में हुई फजीहत
बाबूगढ़ पुलिस का अति-उत्साह यहीं नहीं रुका। उन्होंने पीड़ित को किसी खूंखार अपराधी की तरह हथकड़ी लगाई और सरेराह मोटरसाइकिल पर बैठाकर व पैदल चलाकर कोर्ट तक ले गए। इस अवैध कृत्य का बाकायदा एक प्रेस नोट भी जारी किया गया, ताकि पीड़ित का सामाजिक मान-मर्दन किया जा सके। हालाँकि, जब पीड़ित के अधिवक्ता शिवकुमार शर्मा ने न्यायालय के समक्ष पुलिस की इस अवैध हरकत का कानूनी पोस्टमार्टम किया, तो स्थिति पलट गई। कोर्ट ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए उन्हें भारत के वास्तविक कानून का पाठ पढ़ाया, जिसके बाद आनन-फानन में पुलिस को अपना प्रेस नोट डिलीट करना पड़ा और पीड़ित को छोड़ना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट के नियमों की खुली अवहेलना
कानूनी जानकारों के अनुसार, यह मामला सीधे तौर पर न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) का है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के 'प्रेम शंकर शुक्ला' केस के दिशा-निर्देशों के अनुसार, बिना किसी ठोस कारण या कोर्ट की अनुमति के किसी को हथकड़ी लगाना गैरकानूनी है।
- न्यायालय ने प्रेम शंकर शुक्ला मामले का संदर्भ दिया, जिसने स्थापित किया कि हथकड़ी लगाना आम तौर पर अमानवीय, अनुचित और संविधान के अनुच्छेद 21 के विरुद्ध है। उस मामले में न्यायमूर्ति कृष्ण अय्यर ने बंदी को अपमानित किए बिना भागने से रोकने के लिए अन्य साधनों का उपयोग करने का सुझाव दिया था।
अधिवक्ता शिवकुमार शर्मा ने कानूनी भाषा में कर दिया पुलिस की अवैध हरकत का पोस्टमार्टम
पुलिस का यह 'कानूनी अहंकार' तब चूर-चूर हो गया जब मामला न्यायालय की दहलीज पर पहुँचा। पीड़ित के अधिवक्ता शिवकुमार शर्मा ने जब कानूनी भाषा में पुलिस की इस अवैध हरकत का पोस्टमार्टम किया, तो खाकी की चमक फीकी पड़ गई। अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि कैसे पुलिस ने हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर को ठेंगा दिखाया और सुप्रीम कोर्ट के हथकड़ी संबंधी कड़े नियमों को जूते तले रौंदा। कोर्ट ने इस पर पुलिस को ऐसी कड़ी फटकार लगाई कि अधिकारी बगलें झांकने लगे। न्यायालय ने तल्ख लहजे में पुलिस को भारत के वास्तविक कानून का ज्ञान कराया, जिसके बाद आनन-फानन में पुलिस को अपने पैर पीछे खींचने पड़े और जारी किया गया प्रेस नोट भी 'डिजिटल कचरे' की तरह डिलीट करना पड़ा।
अब DIG मेरठ की रडार पर 'बाबूगढ़ पुलिस'
अपमान की आग में झुलस रहे पीड़ित ने मेरठ पहुँचकर डीआईजी कलानिधि नैथानी को वीडियो साक्ष्य और हाईकोर्ट के आदेश की प्रति सौंपी। डीआईजी ने वीडियो साक्ष्यों और हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर का संज्ञान लेते हुए मामले को अत्यंत गंभीर माना है। डीआईजी ने तत्काल प्रभाव से इस पूरे प्रकरण की विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है। पुलिस विभाग के आला अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद अब दोषी पुलिसकर्मियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है, जिन्होंने माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर खाकी की छवि धूमिल की है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला पुलिस के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है क्योंकि यह न केवल एक अवैध गिरफ्तारी है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के 'प्रेम शंकर शुक्ला' केस के दिशा-निर्देशों का भी खुला उल्लंघन है। हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद की गई यह कार्रवाई पुलिस की दुर्भावनापूर्ण मंशा को दर्शाती है। अब इस मामले की जांच की आंच स्थानीय थाने से लेकर जिला स्तर के उन अधिकारियों तक पहुँच सकती है जिन्होंने साक्ष्यों की अनदेखी कर इस अन्यायपूर्ण कार्रवाई को मौन सहमति दी।