UP News : 15 मिनट के आवेश ने राख कर दिया 15 साल का संबंध , पति पत्नी दोनों की मौत
पत्नी को आग की लपटों में घिरा देख 35 वर्षीय रिंकू उसे बचाने दौड़ा ,इस प्रयास में वह भी बुरी तरह झुलस गया।
ब्यूरो रिपोर्ट : News Flash INDIA- प्रेम और समर्पण की नींव पर टिका 15 साल पुराना रिश्ता महज एक कहासुनी की भेंट चढ़ गया। बुलंदशहर के डिबाई थाना क्षेत्र के ग्राम रहमापुर में घरेलू कलह के बाद एक पत्नी द्वारा स्वयं को आग लगाने और उसे बचाने की कोशिश में पति के भी झुलसने की हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। उपचार के दौरान दोनों ने दम तोड़ दिया, जिससे हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया।
प्रेम विवाह का हुआ दुखद अंत
15 वर्ष पूर्व रिंकू और रूबी ने सामाजिक बंधनों और रूढ़ियों को पीछे छोड़ते हुए प्रेम विवाह किया था। दोनों का जीवन खुशी-खुशी बीत रहा था, लेकिन समय के साथ उनके रिश्ते में घरेलू कलह ने दस्तक दे दी। किसे पता था कि एक दशक से ज्यादा का साथ इस तरह राख के ढेर में तब्दील हो जाएगा।

मामूली कहासुनी बनी त्रासदी
जानकारी के अनुसार, कल दोनों के बीच मामूली कहासुनी हुई थी, जो देखते ही देखते विवाद में बदल गई। आवेश में आकर 32 वर्षीय रूबी ने खुद पर केरोसिन डालकर आग लगा ली। पत्नी को आग की लपटों में घिरा देख 35 वर्षीय रिंकू अपनी जान की परवाह किए बिना उसे बचाने दौड़ा। इस प्रयास में वह भी बुरी तरह झुलस गया।
उपचार के दौरान तोड़ा दम
गंभीर हालत में दोनों को अलीगढ़ हायर सेंटर रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान दोनों ने दम तोड़ दिया। यह बलिदान उस प्रेम की याद दिलाता है जिसने इस रिश्ते की नींव रखी थी, लेकिन साथ ही यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या आपसी विवाद का समाधान इतना भयावह होना चाहिए था।
गांव में पसरा सन्नाटा
एक ही गांव के निवासी रहे इस दंपत्ति की मौत ने न केवल दो परिवारों को उजाड़ दिया है, बल्कि पीछे छोड़ गए बच्चों और परिजनों के जीवन में कभी न भरने वाला दर्द दे दिया है। इस घटना से रहमापुर गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।

एक साथ हुआ अंतिम संस्कार
घटना के बाद दोनों पति-पत्नी का एक साथ ही अंतिम संस्कार किया गया। ग्रामीणों ने नम आंखों से प्रेम विवाह करने वाले इस जोड़े को अंतिम विदाई दी।
संवाद की कमी और मानसिक संतुलन की आवश्यकता
यह घटना दर्शाती है कि घरेलू कलह के समय मानसिक संतुलन और संवाद की कमी किस तरह विनाशकारी साबित हो सकती है। आपसी समझ और बातचीत से बड़े से बड़े विवाद को सुलझाया जा सकता है, लेकिन आवेश में उठाए गए कदम जीवन भर का दर्द दे जाते हैं।