हापुड़: मासूम की आंखों ने देखा मां का खौफनाक चेहरा, पिता के पैर पकड़े बैठी थी मां, प्रेमी ने सीने पर चढ़कर ली जान, 5 साल के मासूम की गवाही ने पहुंचाया सलाखों के पीछे

5 साल के मासूम बच्चे की गवाही ने किया पर्दाफाश। प्यार, बेवफाई और कत्ल की एक ऐसी दास्तां जिसने सभी को झकझोर कर रख दिया है

हापुड़: मासूम की आंखों ने देखा मां का खौफनाक चेहरा, पिता के पैर पकड़े बैठी थी मां, प्रेमी ने सीने पर चढ़कर ली जान, 5 साल के मासूम की गवाही ने पहुंचाया सलाखों के पीछे

हापुड़: पति की हत्यारिन पत्नी

और उसके प्रेमी को उम्रकैद, 5

साल के मासूम की गवाही ने

पहुंचाया सलाखों के पीछे

ब्यूरो रिपोर्ट : News Flash INDIA: जनपद हापुड़ के न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अपने ही पति की हत्या करने वाली पत्नी और उसके प्रेमी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले में सबसे बड़ा आधार मृतक के 5 वर्षीय मासूम बेटे की वह चश्मदीद गवाही बनी, जिसने अदालत में अपनी माँ के 'खौफनाक सच' को उजागर कर दिया।

​घटना का संक्षिप्त विवरण: अवैध संबंधों में बाधक बने पति को दी मौत

​यह सनसनीखेज मामला बाबूगढ़ थाना क्षेत्र के गांव छपकौली का है। 27 अगस्त 2024 को इमरान जो दिव्यांग मजदूर की गला दबाकर हत्या कर दी गई थी। घटना वाले दिन इमरान काम से जल्दी घर लौट आया था, जहाँ उसने अपनी पत्नी रुखसार उर्फ रुखसाना को उसके प्रेमी समीर के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया।

​अपने अवैध संबंधों को छिपाने के लिए दोनों ने मिलकर इमरान की तत्काल हत्या की योजना बनाई। रुखसार ने पति के पैर पकड़े और समीर ने उसके सीने पर बैठकर गला दबाते हुए उसे मौत के घाट उतार दिया।

​'हार्ट अटैक' का बहाना और पुलिस की मुस्तैदी

​हत्या के बाद आरोपियों ने बड़ी शातिरता से इसे प्राकृतिक मौत का रूप देने की कोशिश की। उन्होंने रिश्तेदारों को बताया कि इमरान की मृत्यु हार्ट अटैक से हुई है और वे उसे जल्दबाजी में दफनाने की तैयारी कर रहे थे। हालांकि, पुलिस को गुप्त सूचना मिली और तत्कालीन थाना प्रभारी विजय कुमार गुप्ता ने मौके पर पहुँचकर जांच शुरू की, जिससे साजिश की परतें खुलने लगीं।

​मासूम बेटे की गवाही ने पलटा पूरा केस

​इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मृतक का 5 साल का बेटा बना। विवेचक विजय कुमार गुप्ता ने बच्चे का विश्वास जीतकर पूछताछ की, जिसके बाद धारा 164 के तहत उसके बयान दर्ज कराए गए। अदालत में बच्चे ने तोतली जुबान में वह खौफनाक मंजर बयां किया:

"मम्मी ने पापा के पैर पकड़े हुए थे और समीर अंकल उनके सीने पर बैठकर उन्हें मार रहे थे।"

​पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए और मात्र 82 दिनों (17 नवंबर 2024) के भीतर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। मेडिकल रिपोर्ट में भी स्पष्ट हुआ कि मृत्यु गला दबने और चोटों के कारण हुई थी।

​न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला

​सरकारी वकील (DGC) गौरव नागर ने अदालत में दलील दी कि यह एक निहत्थे दिव्यांग व्यक्ति की नृशंस हत्या है। साक्ष्यों और मासूम की गवाही को आधार मानते हुए, जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने 21 अप्रैल 2026 को आरोपी पत्नी रुखसार और उसके प्रेमी समीर को दोषी करार दिया।

सजा का विवरण:

  • सजा: दोनों आरोपियों को सश्रम आजीवन कारावास।
  • जुर्माना: दोनों पर 50,000 - 50,000 रुपये का अर्थदंड।