सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: जनहित याचिका को बताया 'पब्लिसिटी स्टंट', याचिकाकर्ता से मांगा 5 साल का आयकर रिटर्न
ब्यूरो रिपोर्ट - News Flash INDIA- भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने न केवल याचिका की मंशा पर सवाल उठाए, बल्कि याचिकाकर्ता को अपनी वित्तीय स्थिति का ब्यौरा पेश करने का भी आदेश दिया है।
मामला क्या है?
यह मामला 'साबू स्टीफन बनाम भारत निर्वाचन आयोग' से जुड़ा है। 15 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका की सामग्री और उसके उद्देश्य पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।
- कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और निर्देश:
कार्यवाही के रिकॉर्ड के अनुसार, न्यायालय ने इस मामले में निम्नलिखित आदेश दिए हैं:
- पब्लिसिटी स्टंट करार: न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह याचिका जनहित के नाम पर दाखिल की गई एक 'तुच्छ' (frivolous) याचिका है, जो केवल प्रचार पाने का एक स्टंट मात्र है।
- आय का ब्यौरा तलब: भारी जुर्माना (Exemplary Cost) लगाने से पहले, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वह पिछले 5 वर्षों का अपना आयकर रिटर्न (ITR) रिकॉर्ड पर पेश करे।
- आय के स्रोत का हलफनामा: याचिकाकर्ता को एक हलफनामा (Affidavit) भी दाखिल करना होगा जिसमें उसे अपनी आय के वास्तविक स्रोतों की जानकारी देनी होगी।
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- अगली सुनवाई
न्यायालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अब इसकी अगली सुनवाई 16 फरवरी 2026 के लिए निर्धारित की है।
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, जब भी किसी याचिका को 'तुच्छ' माना जाता है, तो न्यायालय भविष्य में ऐसी याचिकाओं को रोकने के लिए याचिकाकर्ता पर भारी आर्थिक दंड लगा सकता है।
