UP Law News : यूपी के हैवान का मौत का फरमान, मासूम से की थी रूह कांपा देने वाली बर्बरता

UP Law News : यूपी के हैवान का मौत का फरमान,  मासूम से की थी रूह कांपा देने वाली बर्बरता

ब्यूरो रिपोर्ट: News Flash INDIA- उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले से न्याय की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने समाज में कानून के प्रति विश्वास को और सुदृढ़ किया है। यहाँ की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने मात्र 56 दिनों के भीतर सुनवाई पूरी करते हुए, 6 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ बर्बरतापूर्ण दुष्कर्म करने वाले आरोपी को मौत की सजा सुनाई है। 

  • क्या थी पूरी घटना?

यह हृदयविदारक घटना बीते वर्ष 25 जुलाई को घटित हुई थी। आरोप के अनुसार, आरोपी ने घर के बाहर खेल रही 6 साल की मासूम बच्ची को बहला-फुसलाकर अगवा किया और उसके साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। आरोपी ने न केवल बच्ची के साथ दुष्कर्म किया, बल्कि उसके साथ इस कदर बर्बरता की कि बच्ची की हालत अत्यंत नाजुक हो गई थी। 

  • त्वरित कार्रवाई और उपचार

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। दूसरी ओर, गंभीर रूप से घायल बच्ची को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। मासूम की हालत इतनी गंभीर थी कि उसका उपचार अभी तक जारी है। डॉक्टरों और प्रशासन की कड़ी निगरानी में उसे बचाने के प्रयास सफल रहे, लेकिन वह आज भी उस शारीरिक और मानसिक आघात से जूझ रही है।

  • अदालत का ऐतिहासिक फैसला

विशेष पॉक्सो अदालत के न्यायाधीश ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों को देखते हुए इसे 'दुर्लभ से दुर्लभतम' श्रेणी में माना। लोक अभियोजक ने बताया कि:

    • आरोपी को फाँसी की सजा सुनाई गई है।
    • इसके साथ ही उस पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है।
    • अदालत ने पुलिस की त्वरित जांच और सटीक साक्ष्यों की भी सराहना की।
  • विशेष लोग अभियोजक ने दी अपराध से न्याय के संबंध में जानकारी 

लोक अभियोजक पोक्सो कमल सिंह गौतम ने बताया कि यह घटना 25 जुलाई 2025 को उस समय हुई थी, जब दोपहर 2:00 बजे पीड़िता मासूम बच्ची स्कूल से पढ़कर वापस घर लौटी थी उस समय घर पर मासूम बच्ची के माता-पिता मौजूद नहीं थे । इसी दौरान आरोपी अमित रायकवार पुत्र बाबूलाल द्वारा बच्ची के पास पहुंचकर उसको 10 रूपये दिए गए और बच्ची से सामान मंगवाने के बहाने आरोपी 6 साल की मासूम पीड़िता को अपने घर ले गया। 

  • वहशीपन की रूह कांपा देने वाली स्तब्ध कर देने वाली घटना 

इस हैवान द्वारा इतनी बेरहमी से मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया कि देखने वाले लोगों की भी रूह कांप उठी। आरोपी द्वारा मासूम बच्ची के शरीर के हिस्सों को काट लिया गया । इतना ही नहीं मासूम बच्ची की जीभ को भी काटकर आरोपी द्वारा नाली में फेंक दिया गया। और मासूम बच्ची का बाया हाथ भी आरोपी ने तोड़ दिया। आरोपी के वहशीपन की शिकार बनी मासूम बच्ची की हालत बेहद गंभीर हो गई थी ,जिसका अब तक चार बार ऑपरेशन भी हो चुका है लेकिन अभी भी वह ठीक नहीं हो पाई है। पीड़िता बच्ची का इलाज बदस्तूर जारी है। 

  • कुल्हाड़ी लेकर मासूम बच्ची का गला दबाने की कोशिश

कुल्हाड़ी लेकर मासूम बच्ची का गला दबाने की कोशिश भी इस आरोपी अमित द्वारा की गई थी मासूम बच्ची के शरीर पर करीब 18 जगह गंभीर चोटे पाई गई । मासूम पीड़िता के माता-पिता द्वारा उस को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

इस मामले में पुलिस की तत्परता से मासूम बच्ची को तत्काल मेडिकल सुविधा उपलब्ध करवाई गई और पुलिस द्वारा इस मामले में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए इस मामले में कार्यवाही शुरू कर दी गई । इसी दौरान बच्ची की हालत कई बार बिगड़ी जिसको जिले स्तर के सभी अधिकारियों द्वारा बचाने के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराकर अधिकारियों की निगरानी में उसका इलाज लगातार कराया जा रहा है।

जिसको घटना के बाद प्राथमिक उपचार दिया गया और फिर कानपुर के मेडिकल कॉलेज के लिए बच्ची को रेफर कर दिया गया। 

  • मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस प्रदीप कुमार मिश्रा ने दिया ऐतिहासिक फैसला

12 नवंबर 2025 से इस मामले में न्यायालय में कार्यवाही शुरू की गई और दिन प्रतिदिन मामले में सुनवाई के माध्यम से 56 दिन में न्यायालय के समक्ष 10 गवाहों को प्रस्तुत किया गया। इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस प्रदीप कुमार मिश्रा ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जिन्होंने इस आरोपी को 25000 रूपये के आर्थिक दंड के साथ मृत्युदंड  की सजा सुनाई है। आरोपी को उस समय तक फांसी के फंदे पर लटकाया जाए , जब तक इसकी मृत्यु ना हो जाए। लोक अभियोजक कमल सिंह गौतम ने इस मामले में पुलिस की तत्परता और प्रशासन की भूमिका की भी सराहना की । साथ ही न्याय प्रणाली के द्वारा समाज में ऐसे अपराधियों को कठोरतम सजा दिलाने की वकालत करते हुए उन्होंने इस फैसले की सराहना की । उन्होंने इस प्रकार के अपराध को करने की सोच और मानसिकता रखने वाले लोगों के लिए इसे ऐतिहासिक फैसला बताया है।

इस फैसले का स्वागत करते हुए स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों में इतनी त्वरित सजा से अपराधियों के मन में खौफ पैदा होगा। यह फैसला यह भी दर्शाता है कि न्याय प्रणाली मासूमों के साथ होने वाले अपराधों को लेकर कितनी संवेदनशील और कठोर है।