New Delhi : UP News : बिटिया ने किया नाम रोशन, पिता का छू लिया मन: 11 वर्षीय निशानेबाज बेटी ने स्टेट क्वालिफाई कर रचा इतिहास
स्टेट चैंपियनशिप में आरोही तोमर ने बनाया कीर्तिमान
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मात्र 14 दिनों के भीतर प्री-स्टेट और स्टेट में बैक-टू-बैक सफलता; 49वीं यू.पी. स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप 2026 में सब-यूथ कैटेगरी के तहत दिखाई अद्भुत खेल प्रतिभा
News Flash INDIA:खेल प्रभाग, विशेष ब्यूरो नई दिल्ली / हापुड़ : क्षेत्र की एक उभरती हुई नन्हीं खेल प्रतिभा ने वह मुकाम हासिल किया है, जिसने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे समाज और क्षेत्र का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। मात्र 11 वर्ष की अल्पायु में विलक्षण निशानेबाज आरोही तोमर ने नई दिल्ली के प्रतिष्ठित डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज, तुगलकाबाद में आयोजित हो रही '49वीं यू.पी. स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप (एयर, स्मॉल बोर और शॉटगन) 2026' में शानदार प्रदर्शन करते हुए 10 मीटर पिस्टल शूटिंग (सब-यूथ गर्ल्स श्रेणी) में सफलतापूर्वक 'स्टेट क्वालिफाई' कर लिया है।
इस नन्हीं चैंपियन की यह सफलता इसलिए भी ऐतिहासिक और हैरतअंगेज है क्योंकि उन्होंने 7 जून को अपने पहले ही प्रयास में 'प्री-स्टेट क्वालिफाई' किया था और इसके ठीक दो सप्ताह बाद, यानी आज 21 जून को पहली बार में ही 'स्टेट भी क्वालिफाई' कर अपनी अद्वितीय खेल प्रतिभा का लोहा मनवा दिया।
आरोही तोमर का यह कीर्तिमान इस मायने में बेहद खास है कि वह 10 से 16 वर्ष आयु वर्ग की 'सब-यूथ श्रेणी' में अपने से बड़ी उम्र की प्रतिस्पर्धियों के बीच मुकाबला कर रही थीं। प्रतियोगिता के दौरान उनकी एकाग्रता, सटीक निशाना और मानसिक दृढ़ता को देखकर वहां मौजूद खेल विशेषज्ञ और दर्शक भी दंग रह गए। इतनी छोटी उम्र में यह बड़ी उपलब्धि हासिल करना उनकी असाधारण खेल प्रतिभा, कड़े अनुशासन और निरंतर अभ्यास की कहानी बयां करता है।
खेलों से होता है समग्र व्यक्तित्व निर्माण: धीरज तोमर (पिता)
आरोही के पिता श्री धीरज तोमर, जो स्वयं एक प्रतिष्ठित उद्योगपति, समर्पित समाजसेवी, एनजीओ संचालक तथा 'अखंड राजपूताना सेवा संस्थान' (युवा मोर्चा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, अपनी बिटिया की इस ऐतिहासिक सफलता पर भावुक और गर्वित नजर आए। उन्होंने कहा:
"बच्चों को खेलों से जोड़ना केवल एक शारीरिक गतिविधि नहीं, बल्कि उनके चरित्र निर्माण और आत्मविश्वास को मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। खेल हमें अनुशासन, धैर्य और लक्ष्य के प्रति पूर्ण समर्पण सिखाते हैं। मुझे गर्व है कि मेरी बिटिया आरोही ने इतनी कम उम्र में अपने लक्ष्य को पहचाना और इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत की।"

धीरज तोमर ने हमेशा समाज में युवाओं और बच्चों की प्रतिभा को निखारने और उन्हें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने की वकालत की है। आरोही की इस सफलता ने उनके उस विश्वास को और सुदृढ़ किया है कि यदि बच्चों को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे आसमान छू सकते हैं।
मां का मिला अटूट संबल और प्रेरणा
वहीं, आरोही की माता श्रीमती नेहा सिंह तोमर, जो मीडिया जगत से जुड़ी हुई हैं और समाज की गतिविधियों को करीब से देखती हैं, ने भावुक होकर कहा कि बेटी की यह उपलब्धि पूरे परिवार के लिए एक उत्सव जैसी है। उन्होंने कहा कि यह सफलता आरोही की नियमित दिनचर्या, खेल के प्रति उसकी अटूट लगन और घंटों किए गए अभ्यास का ही परिणाम है। एक मां के रूप में उसकी इस विकास यात्रा को देखना बेहद सुखद और प्रेरणादायक है।
कोच कपिल चौधरी के मार्गदर्शन ने दी तकनीकी धार
इस सफलता के पीछे जहां माता-पिता का संबल रहा, वहीं खेल के मैदान पर उनके मार्गदर्शक और कोच कपिल चौधरी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। कोच कपिल चौधरी ने कम उम्र से ही आरोही की खेल क्षमता को पहचाना और उसे तराशने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनके सटीक मार्गदर्शन, तकनीकी प्रशिक्षण और मानसिक मजबूती के गुरों की बदौलत ही आरोही ने इस राज्य स्तरीय चैंपियनशिप में अपनी धाक जमाई और आगामी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए मजबूत दावेदारी पेश की।
बधाइयों का तांता, देश को ओलंपिक पदक की उम्मीद
इस शानदार कीर्तिमान के बाद से ही तोमर परिवार को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। क्षेत्र के संभ्रांत नागरिकों, सामाजिक संगठनों, शुभचिंतकों और खेल प्रेमियों ने आरोही तोमर को उज्ज्वल भविष्य की ढेरों शुभकामनाएं दी हैं। सभी ने एक सुर में विश्वास व्यक्त किया है कि आने वाले समय में आरोही तोमर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी और ओलंपिक जैसे महाकुंभ में पदक जीतकर देश का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज कराकर तिरंगे का मान बढ़ाएंगी।