Hapur News: पंचायती फरमान ने 5 माह पहले ही बुझा दिया नन्हीं जिंदगी का चिराग! बाबूगढ़ में रची गई साजिश, क्या लिंग परीक्षण के बाद स्वस्थ भ्रूण की हत्या हुई ? गंभीर आरोप

जिस मासूम के स्वागत के लिए बाकी थे पूरे साढ़े 5 महीने, क्या लिंग परीक्षण की बलि चढ़ गई उसकी धड़कनें ? हापुड़ में नवविवाहिता का जबरन अबॉर्शन

Hapur News: पंचायती फरमान ने 5 माह पहले ही बुझा दिया नन्हीं जिंदगी का चिराग! बाबूगढ़ में रची गई साजिश, क्या लिंग परीक्षण के बाद स्वस्थ भ्रूण की हत्या हुई ?  गंभीर आरोप

  • मेडिकल रिपोर्ट में दर्ज थी 14 दिसंबर 2026 की डिलीवरी डेट; 160 दिन पहले ही बेटे की चाहत में कोख में खामोश कर दी गई 96 ग्राम मासूम की धड़कन!
  • पीड़ित नवविवाहिता की दबी जुबान में न्याय की गुहार

News Flash INDIA | विशेष रिपोर्ट :  हापुड़ (सूत्रों के हवाले से): जनपद हापुड़ के बाबूगढ़ और सिंभावली थाना क्षेत्रों से एक अत्यंत गंभीर, अमानवीय और संवेदनशील मामला प्रकाश में आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाल ही में ब्याही गई एक नवविवाहिता के गर्भवती होने पर उसके ससुराल पक्ष द्वारा कथित तौर पर आपत्तिजनक व गैरकानूनी कृत्यों को अंजाम दिया गया। सूत्रों से मिली जानकारी और उपलब्ध चिकित्सीय साक्ष्यों के आधार पर आरोप है कि महिला की मर्जी के बिना उसका अवैध लिंग परीक्षण कराया गया और गर्भ में कन्या शिशु होने की बात पता चलने पर जबरन अबॉर्शन गर्भपात कराकर भ्रूण को गुप्त रूप से दफना दिया गया।

​मेडिकल साक्ष्यों से उजागर हुआ पूरा सच

​उपलब्ध चिकित्सीय दस्तावेजों और अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट्स से यह स्पष्ट होता है कि पीड़िता नवविवाहिता रेखा उम्र 25 वर्ष, पत्नी योगेश कुमार, का पहला अल्ट्रासाउंड 17 जून 2026 को 'दया नर्सिंग होम, बाबूगढ़' में कराया गया था। डॉ. एस.एन. कुमार द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, उस वक्त पीड़िता 13 सप्ताह 03 दिन की गर्भवती थी और बच्चे के दिल की धड़कन 144 BPM दर्ज की गई थी, जो पूरी तरह सामान्य थी।

​इसके बाद 20 जून 2026 को 'हापुड़ डायग्नोस्टिक सेंटर' में (अंशुल हॉस्पिटल द्वारा संदर्भित, डॉ. अतुल प्रताप सिंह) में दोबारा अल्ट्रासाउंड हुआ। इस रिपोर्ट में 14 सप्ताह 05 दिन की 'सिंगल लाइव इंट्रायूटेरिन प्रेग्नेंसी' दर्ज की गई, जिसमें बच्चे की धड़कन 151 BPM और वजन 96 ग्राम था।

​दोनों अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट साबित करती हैं कि गर्भ में मौजूद शिशु पूरी तरह स्वस्थ था और उसका विकास सामान्य गति से हो रहा था।

​चिकित्सीय रिपोर्ट और वैज्ञानिक तथ्य: क्या इस चरण में लिंग परीक्षण संभव है?

​उपलब्ध अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता रेखा उम्र 25 वर्ष, पत्नी योगेश कुमार, की दो अलग-अलग जांच रिपोर्ट्स सामने आई हैं:

  • 17 जून 2026 (दया नर्सिंग होम, बाबूगढ़): इस रिपोर्ट में 13 सप्ताह 03 दिन की गर्भावस्था दर्ज है, जिसमें शिशु की धड़कन (FHR) 144 BPM और स्थिति पूरी तरह सामान्य पाई गई।
  • 20 जून 2026 (हापुड़ डायग्नोस्टिक सेंटर): इस रिपोर्ट में 14 सप्ताह 05 दिन की स्वस्थ 'सिंगल लाइव इंट्रायूटेरिन प्रेग्नेंसी' की पुष्टि की गई, जिसमें भ्रूण का वजन 96 ग्राम और धड़कन 151 BPM थी।

मेडिकल व वैज्ञानिक दृष्टिकोण: चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, गर्भावस्था के 11वें से 12वें सप्ताह के दौरान भ्रूण के बाहरी जननांगों का विकास शुरू हो जाता है। 13 से 15 सप्ताह (लगभग 3 से साढ़े 3 महीने) की स्थिति में मशीनों द्वारा शिशु के लिंग की पहचान तकनीकी रूप से काफी हद तक संभव हो जाती है।

​गांव बनखंडा में गुप्त पंचायत, साज़िश और जघन्य अपराध

​सूत्रों के अनुसार आरोप है कि , बाबूगढ़ थाना क्षेत्र के एक अस्पताल या स्कैन सेंटर में पीड़िता का अवैध लिंग परीक्षण कराया गया। लिंग परीक्षण में गर्भ में कन्या होने की बात पता चलते ही ससुराल पक्ष द्वारा उसे समाप्त करने की साजिश रची गई।

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस अमानवीय घटना को अंजाम देने के लिए थाना बाबूगढ़ क्षेत्र के गांव बनखंडा में आरोपी पति योगेश कुमार उर्फ गोलू , उसके परिजनों और रिश्तेदारों द्वारा जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई के प्रथम सप्ताह में गुप्त पंचायतें बुलाई गईं। 15 से 20 दिनों के भीतर कई बार पंचायतें आयोजित हुईं। इन पंचायतों में फैसला लेकर चुपचाप पीड़िता का जबरन अबॉर्शन कराने और गर्भस्थ बच्ची को मारने का निर्णय लिया गया। जिसके बाद स्वस्थ शिशु का अबॉर्शन कराकर स्वस्थ शिशु की हत्या कर दी गई और उसके अवशेषों को साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से थाना सिंभावली क्षेत्र के गांव भरना में चुपचाप दफना दिया गया।

​संक्रमण से महिला की हालत बिगड़ी, दबी जुबान में कानूनी कार्रवाई की मांग

​ताजा मिली जानकारी के अनुसार, इस जबरन व गैरकानूनी अबॉर्शन के कारण पीड़िता के गुप्तांगों व शरीर में गंभीर इंफेक्शन (संक्रमण) फैल गया है। महिला की स्थिति बिगड़ने के कारण उसका पुनः इलाज कराया जा रहा है, जहां वह दर्द और जिंदगी की जंग लड़ रही है। आरोपी पक्ष के कथित दबंग और असरदार होने के कारण पीड़िता डर के साये में है और दबी जुबान में न्याय की गुहार लगा रहा है।

​यह मामला कानूनी रूप से PCPNDT अधिनियम (अवैध लिंग परीक्षण) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत महिला की मर्जी के बिना गर्भपात, भ्रूण हत्या और साक्ष्य छिपाने जैसी गंभीर धाराओं के अंतर्गत आता है।

​विशेष संपादकीय नोट व डिस्क्लेमर (Disclaimer)

ध्यान दें: यह समाचार लेख पूरी तरह से प्राप्त चिकित्सीय अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट्स एवं गुप्त सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। यह संस्थान इस घटना के सत्य होने या न होने अथवा लगाए गए आरोपों की आधिकारिक रूप से पुष्टि या दावा नहीं करता है। यह रिपोर्ट केवल साक्ष्यों और सूत्रों के दावों को निष्पक्ष व संवेदनशील रूप से सामने रखने के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है। प्रशासनिक एवं पुलिस जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।