Hapur News : सुपर वायरल मैन गिरफ्तार , जिसके फोन से निकलते ही वायरल हो जाते हैं वीडियो, असली आरोपी तस्कर फरार, शेयर करने वाला गिरफ्तार असलहा सप्लायर पुलिस की पहुंच से दूर, वीडियो शेयर करने वाला सलाखों के पीछे
हापुड़ में अजब-गजब पुलिसिया कार्रवाई। सोशल मीडिया पर डीएम-एसपी को अपशब्द कहने और खुद को हथियार सप्लायर बताने वाले असली अपराधी तक पुलिस नहीं पहुंच पाई, लेकिन वीडियो शेयर करने वाले युवक को गिरफ्तार कर हवालात भेज दिया। क्या यह जातिगत राजनीति का हिस्सा है? पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
हापुड़ पुलिस के हत्थे चढ़ा ‘सुपर वायरल मैन’: असलहा सप्लायर पुलिस की पहुंच से दूर, वीडियो शेयर करने वाला सलाखों के पीछे!
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हापुड़ पुलिस की अजीबोगरीब कार्रवाई पर उठे सवाल: बदनौली गोलीकांड के बीच 315 बोर के स्वघोषित असलहा तस्कर तक नहीं पहुंची पुलिस, वीडियो वायरल करने वाले को भेजा सलाखों के पीछे ! क्या इसके पीछे है जातिगत राजनीति?
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पुलिसिया मुस्तैदी का अजब कारनामा: मुख्य अपराधी गायब, शेयर करने वाला हवालात में
ब्यूरो रिपोर्ट - News Flash INDIA: उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में कानून-व्यवस्था और पुलिसिया कार्रवाई का एक बेहद अनोखा और अजीबोगरीब मामला सामने आया है। थाना हापुड़ नगर पुलिस ने एक ऐसे ‘सुपर वायरल मैन’ को गिरफ्तार कर हवालात की हवा खिला दी है, जिसके फोन से निकलते ही कोई भी वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल जाता है।
पुलिस ने ग्राम सरावा के निवासी पंकज शर्मा को गिरफ्तार कर अपनी मुस्तैदी का ढिंढोरा तो पीट दिया, लेकिन बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर असली मुजरिम कौन था?
वायरल वीडियो में खुलेआम खुद को 315 बोर के असलहों का सप्लायर बताने वाला, कानून को ठेंगे पर रखने वाला और जिले के डीएम (DM) व एसपी (SP) जैसी संवैधानिक कुर्सी पर बैठे अधिकारियों के लिए सरेआम आपत्तिजनक व अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने वाला मुख्य आरोपी आज भी पुलिस की पकड़ से मीलों दूर है। हापुड़ पुलिस ने “सांप को छोड़कर उसकी लकीर पीटने” वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए मुख्य अपराधी को पकड़ने के बजाय वीडियो फॉरवर्ड करने वाले पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी।

बदनौली गोलीकांड और हथियार सप्लायर का खौफ: अपराध से ज्यादा वीडियो की 'रीच' पर ध्यान
यह पूरी कार्रवाई उस समय और भी अधिक संदेहास्पद और हास्यास्पद हो जाती है, जब सरावा गांव के ठीक बगल में स्थित बदनौली गांव में हाल ही में एक सनसनीखेज गोलीकांड अंजाम दिया गया था। एक तरफ इलाके में अवैध हथियारों से गोलियां चल रही थीं और दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर एक दबंग शख्स खुलेआम हथियार सप्लाई करने का दावा ठोकते हुए जिले के आलाधिकारियों को चुनौती दे रहा था। ऐसे खौफनाक माहौल में कायदे से पुलिस का पहला मकसद उस स्वघोषित हथियार सप्लायर तक पहुंचकर अवैध असलहों के नेटवर्क को ध्वस्त करना होना चाहिए था, ताकि क्षेत्र में किसी बड़ी वारदात को रोका जा सके। परंतु हापुड़ पुलिस की प्राथमिकता में अपराध नियंत्रण और असलहा तस्कर की गिरफ्तारी से ज्यादा सोशल मीडिया पर वीडियो की 'रीच' कम करना नजर आया। मुख्य आरोपी को पकड़ने के बजाय पुलिस ने ‘सुपर वायरल’ करने वाले को जेल की सलाखों के पीछे डालकर मामले की इतिश्री कर ली।

जातिगत राजनीति या प्रशासनिक मेहरबानी? उठ रहे निष्पक्षता पर गंभीर सवाल
पुलिस की इस जल्दबाजी और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के बाद अब स्थानीय गलियारों और सोशल मीडिया पर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। लोग खुलकर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर क्या वजह है कि असली गुनहगार, जो सीधे तौर पर हथियारों की तस्करी और प्रशासनिक अधिकारियों को गाली देने का दम भर रहा है, वह बेखौफ घूम रहा है? क्या इस पूरी कार्रवाई के पीछे पर्दे के पीछे से कोई जातिगत राजनीति काम कर रही है? क्या किसी खास वर्ग से ताल्लुक रखने वाले मुख्य आरोपी को संरक्षण दिया जा रहा है और दूसरे को बलि का बकरा बनाया जा रहा है? जिस तरह से असली हथियार सप्लायर को छोड़कर केवल वीडियो शेयर करने वाले पंकज शर्मा पर गाज गिराई गई है, उसने हापुड़ पुलिस की कार्यप्रणाली, नीयत और निष्पक्षता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।