हापुड़ में हाई-वोल्टेज चुनावी ड्रामा, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का ज्ञान; अवैध कब्जे का फरमान, टैक्स बार में छिड़ा नया घमासान

हापुड़ टैक्स बार एसोसिएशन में स्वघोषित चेयरमैन के अवैध कब्जे के प्रयास और समानांतर चुनाव को लेकर घमासान छिड़ गया है। नवनिर्वाचित अध्यक्ष वेद प्रकाश अरोरा ने एसडीएम से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी।

हापुड़ में हाई-वोल्टेज चुनावी ड्रामा, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का ज्ञान; अवैध कब्जे का फरमान, टैक्स बार में छिड़ा नया घमासान
प्रतीकात्मक फोटो

News Flash INDIA —

विशेष रिपोर्ट

स्वयंभू 'चेयरमैन' का तख्तापलट या 'बिल्ली देख आंख बंद करता कबूतर'? टैक्स बार एसोसिएशन में अवैध कब्जे का हाई-वोल्टेज ड्रामा!

  • मूल कमेटी को ठेंगा दिखा एक अकेले सदस्य ने रची 'व्हाट्सएप क्रांति'; असली कार्यकारिणी चुनी गई, तो अब 'सिटी प्लाजा' में सजेगा फर्जी चुनावी तमाशा!

हापुड़ (News Flash INDIA ब्यूरो)। कहते हैं कि जब किसी की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं उसके कद से ज्यादा बड़ी हो जाएं, तो इंसान खुद को 'सुल्तान-ए-आलीशान' समझने की भूल कर बैठता है। कुछ ऐसा ही हास्यप्रद और अद्भुत नजारा इन दिनों हापुड़ के प्रतिष्ठित लीगल कॉरिडोर यानी 'टैक्स बार एसोसिएशन' TBA में देखने को मिल रहा है। एसोसिएशन के भीतर लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर एक स्वयंभू 'व्हाट्सएप क्रांति' के जरिए संस्था पर अवैध कब्जे का एक ऐसा हताश प्रयास हुआ है, जिसने वकीलों के बीच कानून की दलीलों से ज्यादा ठहाकों को जगह दे दी है।

​कानूनी हलकों में चर्चा है कि यह पूरा मामला 'थोथा चना बाजे घना' और 'बिल्ली को देखकर कबूतर द्वारा आंखें बंद कर लेने' जैसी उपमाओं पर बिल्कुल सटीक बैठता है। जिस तरह बिल्ली को सामने देखकर कबूतर आंखें मूंद लेता है और सोचता है कि आफत टल गई, ठीक उसी तरह एसोसिएशन के एक अति-उत्साही माननीय सदस्य ने कानून और नियमों के आगे अपनी आंखें बंद कर लीं और यह मान बैठे कि उनके एकतरफा फरमान से पूरी बार काउंसिल उनके कदमों में झुक जाएगी!

11 जून की 'वैध शुरुआत' पर फिरा 'तानाशाही' का पानी

​पूरे मामले की कानूनी कड़ियों को जोड़ें तो कहानी 11 जून 2026 से शुरू होती है। टैक्स बार एसोसिएशन हापुड़ के वर्ष 2026-27 के चुनावों को पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए आमसभा ने सर्वसम्मति से एक त्रि-सदस्यीय 'एल्डर कमेटी' का गठन किया था। इस कमेटी में वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अशोक गोयल को चेयरमैन, जबकि श्री राकेश कुमार गोयल और श्री एम. एल. दुआ को सदस्य बनाया गया था। चुनाव कराने की जिम्मेदारी मुख्य चुनाव अधिकारी एडवोकेट संजय कौशिक को सौंपी गई थी।

​21 जून 2026 को उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जांच (Scrutiny) भी हो गई, जिस पर मुख्य चुनाव अधिकारी के साथ-साथ चेयरमैन अशोक गोयल और सदस्य राकेश गोयल के वैध हस्ताक्षर थे। सब कुछ कायदे से चल रहा था, लेकिन तभी एल्डर कमेटी के तीसरे सदस्य श्री एम. एल. दुआ के भीतर का 'स्वयंभू नेता' जाग उठा।

एक अकेले सदस्य की 'व्हाट्सएप हुकूमत' और स्वघोषित चेयरमैनशिप!

​श्री एम. एल. दुआ ने सोचा कि जब बाकी दो सदस्य काम कर ही रहे हैं, तो क्यों न मैं अकेले ही इतिहास रच डालूं! उन्होंने बाकी दोनों सहयोगियों और तत्कालीन प्रबंध समिति को बिना बताए, खुद को एल्डर कमेटी का 'स्वयंभू चेयरमैन' घोषित कर दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने "एल्डर कमेटी टैक्स बार एसोसिएशन हापुड़" नाम से एक समानांतर व्हाट्सएप ग्रुप बना डाला और लगे ताबड़तोड़ फरमान जारी करने।

​व्यंग्यकारों का कहना है कि यह तो वही बात हुई कि “सूत न कपास, जुलाहे से लठ्ठमलट्ठा!” बिना किसी लोकतांत्रिक अधिकार के, श्री दुआ ने 25 जून को एक 'साधारण सभा' बुला ली और अपनी मर्जी से तीन नए सदस्य—अशोक गोस्वामी, राकेश गोयल और मूल चंद जिंदल को कमेटी में जोड़ दिया। मजेदार बात यह है कि जिन वरिष्ठ सदस्यों को उन्होंने कमेटी में खींचा, वे अपनी 70 वर्ष से अधिक आयु होने के कारण पहले ही लिखित रूप से एसोसिएशन की सक्रिय जिम्मेदारियों से स्वैच्छिक संन्यास ले चुके थे। अब बेचारे संन्यासियों को जबरन डिजिटल अखाड़े में उतारने की यह कला सिर्फ हापुड़ के इस स्वघोषित चाणक्य के पास ही हो सकती है!

वैधानिक कार्यकारिणी का हंटर: जेल जाने की आ गई नौबत?

​इस डिजिटल और कागजी तख्तापलट पर तत्कालीन अध्यक्ष एडवोकेट जे. के. पाल और महासचिव एडवोकेट सीमा मित्तल ने कड़ा एक्शन लेते हुए श्री एम. एल. दुआ को एक तीखा अंतिम चेतावनी पत्र (Ref. No. TBA/2025-26/39) थमा दिया।

​इस पत्र ने स्वघोषित चेयरमैन के कानूनी ज्ञान की धज्जियां उड़ा दीं। एसोसिएशन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि बार से निष्कासित वकीलों के साथ मिलकर समानांतर ग्रुप चलाना और भ्रामक प्रचार करना कोई बच्चों का खेल नहीं है। यह सीधे तौर पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 319(2), 318, 336(2), 336(3), 353 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) 2000 के तहत गंभीर और दंडनीय आपराधिक श्रेणी में आता है। कानून के रक्षक ही जब कानून को मखमली जूता मारने की कोशिश करें, तो सलाखों के पीछे की हवा याद दिलाना जरूरी हो जाता है।

असली चुनाव संपन्न, नए अध्यक्ष पहुंचे एसडीएम की शरण में

​तमाम रुकावटों और स्वयंभू गुट के ड्रामे के बावजूद, 26 जून 2026 को टैक्स बार एसोसिएशन के वैध और वैधानिक चुनाव भारी बहुमत के साथ संपन्न हो गए। लोकतांत्रिक तरीके से एडवोकेट वेद प्रकाश अरोरा को नया अध्यक्ष और एडवोकेट अमित कुमार मित्तल को महासचिव चुना गया, जिन्होंने बकायदा कार्यभार भी संभाल लिया है।

​मगर कहानी का क्लाइमेक्स अभी बाकी है! खुद को कानून से ऊपर समझने वाले परास्त गुट ने अब 'खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे' की तर्ज पर आगामी 16 जुलाई 2026 को रेलवे रोड स्थित 'सिटी प्लाजा' में एक समानांतर और पूरी तरह 'फर्जी चुनाव' कराने का नया शिगूफा छोड़ दिया है। इस कथित फर्जी चुनाव के लिए उन्होंने जिस एडवोकेट मनीष राय को मुख्य चुनाव अधिकारी बनाया है, उनके अपने पिछले (वर्ष 2023-24 के) चुनाव का एक मुकदमा (वाद संख्या 03/2024) आज भी अदालत में विचाराधीन है। यानी, 'मर्ज बढ़ता गया, ज्यों-ज्यों दवा की!'

​मामले की गंभीरता को देखते हुए नवनिर्वाचित वैध अध्यक्ष वेद प्रकाश अरोरा ने उप-जिलाधिकारी (SDM), हापुड़ सदर को एक आधिकारिक पत्र (Ref. No. TBA/2026-27/06) सौंपकर सिटी प्लाजा में होने वाले इस गैर-कानूनी तमाशे और शांति-भंग की कोशिश को तुरंत रोकने की गुहार लगाई है।

News Flash INDIA की संपादकीय टिप्पणी:

​टैक्स बार एसोसिएशन हापुड़ का यह पूरा प्रकरण इस बात का जीवंत प्रमाण है कि डिजिटल दौर में कोई भी व्यक्ति चार लोगों को व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर खुद को राजा मान सकता है। लेकिन लोकतंत्र और कानून 'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी' के नियमों से नहीं, बल्कि स्थापित बायलॉज से चलते हैं। देखना दिलचस्प होगा कि हापुड़ प्रशासन और बार काउंसिल उत्तर प्रदेश इस 'स्वयंभू चेयरमैनशिप' के गुब्बारे की हवा किस कानूनी हथौड़े से निकालते हैं।

News Flash INDIA इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। नियमों को ताक पर रखकर सटने वाले इस 'चुनावी बाजार' का हश्र क्या होगा, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल वकीलों की इस जमात में यह तमाशा भरपूर मनोरंजन का साधन बना हुआ है!