हापुड़: पैसे कमाने के फेर में जान से खिलवाड़, डायग्नोस्टिक सेंटर ने धोखाधड़ी कर थमाई फर्जी रिपोर्ट, रिपोर्ट दिखाकर मरीज को दहशत में डाला , मेरठ हुई जांच में हुआ पर्दाफाश
हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर में एक डायग्नोस्टिक सेंटर पर गलत फर्जी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देने का आरोप लगा है। मरीज ने CMO और IGRS पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर जांच की मांग की है।
हापुड़: पैसे कमाने के फेर में जान से खिलवाड़, डायग्नोस्टिक सेंटर ने धोखाधड़ी कर थमाई फर्जी रिपोर्ट, 179 mm लिवर दिखाकर मरीज को दहशत में डाला
News Flash INDIA
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल: क्या इलाज के नाम पर सिर्फ पैसे ऐंठना रह गया है मकसद?
रिपोर्ट: News Flash INDIA- निशांक शर्मा - गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़)। क्या स्वास्थ्य सेवाओं का काम केवल रिपोर्ट थमाना और मरीजों से पैसे ऐंठना रह गया है? जब किसी मरीज की मेडिकल टेस्ट रिपोर्ट ही गलत जारी कर दी जाए, तो उसे सही इलाज मिलना कैसे मुमकिन होगा? सबसे बड़ा और खतरनाक सवाल यह है कि अगर उसी गलत रिपोर्ट के आधार पर किसी मरीज का गलत इलाज या दवाइयाँ शुरू कर दी जाएँ, तो यह लापरवाही किसी के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती है।
हापुड़ जनपद के गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र से सामने आया यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था की घोर संवेदनहीनता, लापरवाही और पैसे कमाने के अंधे खेल पर बेहद गंभीर सवाल खड़े करता है।
179 mm दिखाया लिवर: श्री कृष्णा डायग्नोस्टिक सेंटर पर फर्जीवाड़े का आरोप
हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र में स्याना रोड स्थित 'श्री कृष्णा डायग्नोस्टिक सेंटर' पर आरोप है कि उसने एक मरीज के जीवन के साथ खिलवाड़ करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
पूरा मामला हापुड़ के बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के गांव भैना का है। यहाँ के निवासी प्रदीप शर्मा पुत्र बालेश्वर शर्मा का लिवर संबंधी बीमारी का इलाज मेरठ में चल रहा है। बीती 24 जुलाई को जब उन्होंने गढ़मुक्तेश्वर के स्याना रोड स्थित श्री कृष्णा डायग्नोस्टिक सेंटर पर पेट का अल्ट्रासाउंड कराया, तो सेंटर द्वारा जारी रिपोर्ट में उनके लिवर का साइज 179 mm (हेपेटोमेगाली) दर्शा दिया गया।
मेडिकल साइंस के मुताबिक 179 mm लिवर होना बेहद चिंताजनक और गंभीर स्थिति मानी जाती है। इस डरावनी रिपोर्ट को देखते ही मरीज और उनका पूरा परिवार बुरी तरह घबरा गया और मानसिक रूप से टूट गया।
मेरठ में खुला फर्जीवाड़े का सच: दोबारा जांच में 136.7 mm निकला लिवर
दहशत और तनाव के माहौल में पीड़ित परिजन तुरंत मरीज को लेकर मेरठ में अपने चिकित्सक डॉ. ध्रुव जैन के पास पहुंचे। रिपोर्ट की अति-गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर ने दोबारा जांच की सलाह दी।
इसके बाद 25 जुलाई को मेरठ के शास्त्री नगर स्थित डायग्नोस्टिक सेंटर में जब दोबारा पेट का अल्ट्रासाउंड कराया गया, तो सच सामने आ गया जिसने सभी को चौंका दिया।
- गढ़मुक्तेश्वर सेंटर की रिपोर्ट: लिवर का आकार 179 mm (खतरनाक स्थिति)
- मेरठ सेंटर की रिपोर्ट: लिवर का आकार महज 136.7 mm (पूरी तरह सामान्य)
डॉक्टर ने जब परिजनों को आश्वस्त किया कि मरीज का लिवर बिल्कुल सही है और घबराने की कोई बात नहीं है, तब जाकर पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली। लेकिन इसके साथ ही यह सवाल खड़ा हो गया कि गढ़मुक्तेश्वर के सेंटर ने ऐसी जानलेवा लापरवाही आखिर क्यों और किस नीयत से की?
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए तीखे सवाल
इतनी बड़ी संवेदनहीनता के बाद अब सबसे बड़ा सवाल हापुड़ के स्वास्थ्य विभाग और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है:
- सक्षमता पर सवाल: जो डायग्नोस्टिक सेंटर एक सही जांच तक करने की क्षमता नहीं रखते, आखिर उन्हें मरीजों की जिंदगी से खेलने की छूट कैसे मिली हुई है?
- प्रशासनिक ढील: जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ऐसे सेंटरों को बेधड़क चलने की अनुमति कैसे दे रहा है?
- लापरवाही का अंजाम: क्या स्वास्थ्य विभाग को किसी बड़े हादसे या किसी मरीज की जान जाने का इंतजार है?
पीड़ित ने की CMO से शिकायत: सेंटर को तुरंत सील करने की मांग
इस घोर लापरवाही और फर्जीवाड़े से आहत पीड़ित प्रदीप शर्मा ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) हापुड़ और जनसुनवाई (IGRS) पोर्टल पर लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
पीड़ित ने मांग की है कि:
- आरोपी 'श्री कृष्णा डायग्नोस्टिक सेंटर' के खिलाफ उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की जाए।
- मरीज के जीवन से खिलवाड़ करने वाले इस सेंटर को तुरंत प्रभाव से सील किया जाए।
- फर्जी रिपोर्ट जारी करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी अन्य बेकसूर मरीज की जिंदगी खतरे में न पड़े।