हापुड़: स्नातक में 32.68% और शिक्षक निर्वाचन में 61.78% हुआ मतदान, जानें समय-वार आंकड़े
मेरठ-हापुड़ स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के तहत हापुड़ में मतदान शांतिपूर्ण संपन्न हुआ। शाम 4 बजे तक शिक्षक निर्वाचन में कुल ......
हापुड़: स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन में मतदाताओं ने दिखाया उत्साह, शाम 4 बजे तक स्नातक का 32.68% और शिक्षक का 61.78% मतदान
हापुड़: मेरठ खंड स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के तहत हापुड़ जिले में मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण और सुचारू रूप से संपन्न हुई। जिला सूचना विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, मतदाताओं का उत्साह भी बढ़ता गया। शाम 04 बजे तक शिक्षक निर्वाचन में सबसे अधिक 61.78% और स्नातक निर्वाचन में 32.68% मतदान दर्ज किया गया।

समय-वार मतदान प्रतिशत की चाल (क्रमिक वृद्धि)
सुबह से लेकर शाम तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर दो घंटे के अंतराल पर मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली:
| समयावधि | स्नातक निर्वाचन प्रतिशत | शिक्षक निर्वाचन प्रतिशत |
|---|---|---|
| प्रातः 10:00 बजे तक | 5.92% | 15.46% |
| अपरान्ह 12:00 बजे तक | 15.92% | 38.58% |
| अपरान्ह 02:00 बजे तक | 22.87% | 52.17% |
| शाम 04:00 बजे तक | 32.68% | 61.78% |
प्रमुख विश्लेषण एवं निष्कर्ष
- शिक्षकों में दिखा भारी उत्साह: शुरुआत से ही शिक्षक मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया। सुबह 10 बजे ही शिक्षक वर्ग का मतदान 15.46% पर पहुंच गया था, जो दोपहर 12 बजे तक दोगुने से अधिक (38.58%) और शाम 4 बजे तक 61.78% के मजबूत आंकड़े को छू गया। यह इस बात का प्रमाण है कि शिक्षक अपने अधिकारों और नेतृत्व को लेकर बेहद जागरूक हैं।
- स्नातक निर्वाचन में क्रमिक सुधार: स्नातक कोटे के मतदाताओं ने भी धीरे-धीरे मतदान केंद्रों का रुख किया। सुबह 10 बजे मात्र 5.92% मतदान हुआ था, जो दोपहर 12 बजे (15.92%) और 2 बजे (22.87%) से होता हुआ शाम 4 बजे 32.68% तक जा पहुंचा। कामकाजी दिन होने के बावजूद स्नातकों की भागीदारी संतोषजनक रही।
- शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित मतदान: लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, हापुड़ के निर्धारित 29 मतदान केंद्रों पर मतदान प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से चली। जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे मतदाताओं को कतारों में अपनी बारी का इंतजार करने में कोई विशेष असुविधा नहीं हुई।
इस चुनाव परिणाम और मतदान के रुख से साफ जाहिर होता है कि मतदाता अपने जनप्रतिनिधियों के चयन को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं और उन्होंने लोकतंत्र के इस पर्व में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई है।