मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड: कोर्ट ने मुस्कान और प्रेमी साहिल को सुनाई मृत्युदंड की सजा

मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पत्नी मुस्कान और प्रेमी साहिल को सौरभ राजपूत की हत्या के जुर्म में मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है। परिवार ने इस फैसले पर

मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड: कोर्ट ने मुस्कान और प्रेमी साहिल को सुनाई मृत्युदंड की सजा

मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड: कोर्ट ने मुस्कान और प्रेमी साहिल को सुनाई मृत्युदंड की सजा, परिवार ने जताई संतुष्टि

News Flash INDIA 

ब्यूरो रिपोर्ट: News Flash INDIA: ​मेरठ: - बहुचर्चित नीला ड्रम हत्याकांड (सौरभ राजपूत हत्याकांड) में अदालत ने आज एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने मामले के दोषियों—मृतक की पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल—को जघन्य हत्या का दोषी मानते हुए मृत्युदंड (फांसी की सजा) की सजा सुनाई है। फैसले के दौरान दोनों की वर्चुअल पेशी कराई गई।

​अदालत का फैसला और आर्थिक दंड

​अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में कुल 22 गवाहों की गवाही कराई गई थी। पुलिस की मजबूत विवेचना और शासकीय अधिवक्ता के तर्कों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को सजा सुनाई।

  • ​हत्या (धारा 302): दोनों दोषियों को मृत्युदंड के साथ-साथ 50,000 रुपये का आर्थिक दंड भी दिया गया है।

  • ​साक्ष्य छुपाने (धारा 238ए): इस धारा के तहत 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

​शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे और एडवोकेट उर्वशी चौधरी ने इसे न्याय की एक बड़ी जीत बताया है। अधिवक्ता ने महाभारत का हवाला देते हुए कहा कि अपराधियों को उनके कुकर्मों के अनुसार ऐसी सजा मिलना ही धर्म और न्याय है, जो देश में एक मिसाल बनेगी।

​क्या था पूरा मामला?

​यह सनसनीखेज मामला 3 मार्च 2025 का है। आरोपी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल ने मिलकर सौरभ राजपूत की निर्ममता से हत्या कर दी थी। हत्या के बाद शव के टुकड़े कर उन्हें एक नीले ड्रम में डालकर छुपा दिया गया था। इस खौफनाक वारदात ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

​न्याय मिलने पर छलकी परिजनों की आंखें, बंटी मिठाइयां

​डेढ़ साल तक चले लंबे संघर्ष और नवरात्रों में रखे गए व्रतों के बाद अदालत के इस फैसले से सौरभ राजपूत के परिवार ने राहत की सांस ली है। फैसले के बाद कोर्ट परिसर में परिजनों और समर्थकों ने मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई।

​मृतक की माता रेनू और भाई राहुल ने कहा कि वे शुरू से ही दोनों को फांसी की सजा दिए जाने की मांग कर रहे थे। परिवार ने डेढ़ साल तक कड़ा इंतजार किया और अंततः उन्हें न्याय मिला है। इसके साथ ही परिजनों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरोपी इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट जाते हैं, तो सौरभ का परिवार और उनके वकील हर कदम पर उनका पीछा करेंगे और अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।

​सौरभ की 6 साल की बेटी के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेगा परिवार

​सौरभ राजपूत के भाई राहुल ने बताया कि परिवार सौरभ की आखिरी निशानी यानी उनकी 6 साल की बेटी को अपने पास रखना चाहता है। राहुल के अनुसार, वे पहले भी बच्ची को अपने साथ रखना चाहते थे, लेकिन उसके नाना-नानी उसे नहीं दे रहे थे। अब परिवार इसके लिए न्यायालय का रुख करेगा और कानूनी लड़ाई लड़ेगा। वहीं, जेल में जन्मी बच्ची को लेकर परिवार ने साफ कर दिया कि वे उसे अपनाने से इंकार करते हैं और इस मामले में डीएनए टेस्ट का सहारा भी लिया जा सकता है।