Hapur: CMO साहब हुए लाचार,बोले वेतन के बदले मांगे 75 हजार , सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर किये गंभीर दावे

जब 'साहब' ही हो गए बेबस हापुड़ स्वास्थ्य विभाग में 'कुर्सी, कमीशन और खुन्नस' का कॉकटेल

Hapur: CMO साहब हुए लाचार,बोले वेतन के बदले मांगे 75 हजार , सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर किये गंभीर दावे

जब 'साहब' ही हो गए बेबस: हापुड़ स्वास्थ्य विभाग में 'कुर्सी, कमीशन और खुन्नस' का कॉकटेल!

​News Flash INDIA: विशेष रिपोर्ट : निशांक शर्मा

​सरकारी सिस्टम की माया भी बड़ी निराली है! यहाँ कब कौन राजा से रंक बन जाए और कब किसके दस्तखत की कीमत 'शून्य' हो जाए, कहा नहीं जा सकता। ताजा तरीन और बेहद दिलचस्प मामला हापुड़ के स्वास्थ्य महकमे से सामने आया है। चंद महीने पहले तक जिस शख्स के अस्पताल परिसर में कदम रखते ही बड़े-बड़े डॉक्टरों के पसीने छूट जाते थे और निचले स्तर के कर्मचारी 'साहब आए, साहब आए' कहकर सीधे खड़े हो जाते थे, आज वही पूर्व साहब अपने ही विभाग के बाबू और अफसरों के सामने 'लाचार' नजर आ रहे हैं।

​जी हां, हम बात कर रहे हैं हापुड़ के पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. सुनील त्यागी की, जिनका दर्द इन दिनों फेसबुक पर मीठे रस की तरह नहीं, बल्कि कड़वी हकीकत बनकर छलक रहा है।

​कल के 'सिस्टम' आज खुद 'मरीज'!

​वक्त का पहिया देखिए कितनी तेजी से घूमा है। डॉ. सुनील त्यागी 31 मार्च 2026 तक पूरे जिले के स्वास्थ्य महकमे के कप्तान यानी CMO हुआ करते थे। रिटायरमेंट हुआ, तो सोचा होगा कि चलो समाज सेवा जारी रखते हैं। उन्होंने 1 अप्रैल 2026 से जिला संयुक्त चिकित्सालय में वरिष्ठ परामर्शदाता (सीनियर कंसलटेंट) के पद पर जॉइनिंग दे दी। मरीजों का इलाज करने पहुंचे पूर्व सीएमओ साहब को क्या पता था कि अस्पताल प्रशासन पहले से ही उनका 'विशेष इलाज' करने की फाइल दबाए बैठा है!

​डॉ. त्यागी ने फेसबुक पर अपने सोशल मीडिया पोस्ट से साफ जाहिर किया है कि अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका (CMS) डॉ. हेमलता और वहां के एक रसूखदार बाबू अनिल ने मिलकर उनके अप्रैल और मई महीने का वेतन ही हजम कर लिया है (रोक दिया है)।

"कल तक जो साहब दूसरों की सैलरी फाइलों पर 'अप्रूव्ड' का ठप्पा मारते थे, आज उन्हें खुद अपनी गाढ़े पसीने की कमाई के लिए अस्पताल के बाबू के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।"

​'नो कुर्सी, नो टेबल' – पुराने दफ्तर से मांगकर चलाया काम

​व्यवस्था पर करारा व्यंग्य तो तब देखने को मिला जब एक सीनियर कंसलटेंट और पूर्व जिला प्रमुख को जॉइनिंग के बाद बैठने के लिए एक अदद कमरा, टेबल और कुर्सी तक नसीब नहीं हुई। भेदभाव और उत्पीड़न का आलम यह था कि साहब को अपने पुराने सीएमओ दफ्तर से खुद एक कुर्सी मांगकर लानी पड़ी ताकि बैठकर मरीजों को देख सकें।

​कहानी में ट्विस्ट: 7.5 लाख का एरियर और 10% का 'इलाज'

​सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों के मुताबिक, इस कहानी में असली ट्विस्ट तब आता है जब भ्रष्टाचार का 'ओपन रेट' सामने आता है। डॉ. त्यागी का आरोप है कि बाबू अनिल और CMS डॉ. हेमलता ने उनकी रुकी हुई एरियर राशि (लगभग 7.5 लाख रुपये) को पास करने के एवज में 10 प्रतिशत कमीशन यानी 75,000 रुपये की नकद रिश्वत मांग ली। डॉक्टर साहब ने फेसबुक पोस्ट पर बकायदा लिखा भी है: "सी एम एस हेमलता व अनिल बाबू वेतन निकालने के मांग रहे 75000/- नकद"

​मजेदार (या कहें शर्मनाक) बात यह है कि पूर्व साहब किश्तों में 25,000 रुपये दे भी चुके थे। लेकिन जैसे ही उन्होंने अंतिम 50,000 रुपये देने में आनाकानी की, सिस्टम ने तुरंत अपना रंग दिखाया और 'ट्रेजरी कोड' व 'कागजी कमियों' का बहाना बनाकर उनके अप्रैल और मई के वेतन पर ताला जड़ दिया। डॉक्टर साहब का गुस्सा सोशल मीडिया पर साफ फूट रहा है, जहाँ उन्होंने व्यवस्था को आड़े हाथों लेते हुए लिखा: "संयुक्त चिकित्सालय हापुड़ की सी एम एस डॉ हेमलता व अनिल बाबू की गुण्डागर्दी मेरा माह अप्रैल व मई का वेतन रोक रखा है।"

​पुरानी खुन्नस और 'पतिदेव' का प्रभार

​अब आप सोच रहे होंगे कि एक पूर्व बॉस से कोई बाबू और मौजूदा CMS इतनी दुश्मनी क्यों मोल लेंगे? तो साहब, इसकी जड़ें 'पुरानी खुन्नस' में छिपी हैं। डॉ. त्यागी के मुताबिक, जब वे जिले के CMO थे, तब उन्होंने तत्कालीन परिस्थितियों में वर्तमान CMS डॉ. हेमलता के पतिदेव को कोई मनचाहा 'प्रभार' (चार्ज) नहीं सौंपा था। बस! तभी से बदला लेने की स्क्रिप्ट लिखी जा रही थी, जो साहब के रिटायर होते ही और मातहत बनते ही 'रिलीज' कर दी गई।

​सीधे जनता की अदालत में साहब

​विभागीय चौखटों पर जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो आहत होकर पूर्व CMO साहब ने किसी कागजी शिकायत या विजिलेंस के चक्कर काटने के बजाय सीधे डिजिटल हथियार उठाया और फेसबुक पर पोस्ट डालकर जनता के सामने पूरी व्यवस्था को नंगा कर दिया। फिलहाल, इस मानसिक और वित्तीय उत्पीड़न से परेशान होकर डॉक्टर साहब खुद 'अनिश्चितकालीन चिकित्सकीय अवकाश' (Medical Leave) पर चले गए हैं।