हापुड़: सपा कार्यालय पर ध्वजारोहण के दौरान तिरंगे और राष्ट्रगान का अपमान, वीडियो वायरल
हापुड़ में स्वतंत्रता दिवस पर समाजवादी पार्टी कार्यालय में ध्वजारोहण के दौरान राष्ट्रगान और भारतीय ध्वज संहिता के उल्लंघन का वीडियो वायरल होने पर विवाद गहराया। जानिए क्या हैं नियम और कानूनी पहलू।

हापुड़: सपा कार्यालय पर ध्वजारोहण के दौरान तिरंगे और राष्ट्रगान के अनादर पर बढ़ा विवाद, वीडियो वायरल

News Flash INDIA
News Flash INDIA: हापुड़ (ब्यूरो निशांक शर्मा रिपोर्ट): स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हापुड़ में समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय पर आयोजित ध्वजारोहण समारोह में राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगे) और राष्ट्रगान के नियमों के उल्लंघन का एक गंभीर मामला सामने आया है। कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इसे तिरंगे और राष्ट्रगान के अनादर से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्या है पूरा मामला और वायरल वीडियो का सच?
15 अगस्त 2026 को बुलंदशहर रोड स्थित सपा जिला कार्यालय पर जिलाध्यक्ष आनंद गुर्जर की अध्यक्षता में ध्वजारोहण का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। पार्टी द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट में दावा किया गया कि प्रातः 10:00 बजे पूर्ण गरिमा के साथ ध्वजारोहण कर राष्ट्रगान गाया गया।

हालांकि, मौके के वायरल वीडियो में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि जब राष्ट्रगान की पंक्तियां ("जन गण मन...") गूंज रही थीं, तब तिरंगा पूरी तरह से ऊपर नहीं फहराया गया था। राष्ट्रगान चलने के दौरान कई नेता और कार्यकर्ता राष्ट्रगान के सम्मान में स्थिर खड़े होने के बजाय पोल की डोरी खींचने, झंडे को ऊपर चढ़ाने और हाथ से उलझन सुलझाने में लगे हुए थे।
क्यों माना जा रहा है इसे तिरंगे का अपमान?
कानूनी विशेषज्ञों और ध्वज नियमावली के अनुसार, इस पूरे प्रकरण को तिरंगे व राष्ट्रगान के अनादर की श्रेणी में रखा जा रहा है:
- ध्वजारोहण का समय गलत होना: भारतीय ध्वज संहिता Flag Code of India, 2002 के नियमों के अनुसार ध्वजारोहण की प्रक्रिया राष्ट्रगान शुरू होने से पहले ही पूरी हो जानी चाहिए। राष्ट्रगान के बीच में ध्वज की डोरी खींचना या उसे फहराने की कोशिश करना तिरंगे का अनादर है।
- राष्ट्रगान के दौरान हलचल: राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 Prevention of Insults to National Honour Act, 1971
के तहत राष्ट्रगान के दौरान किसी भी प्रकार की हलचल, डोरी खींचना या अव्यवस्था पैदा करना नियमों का उल्लंघन है। राष्ट्रगान बजते समय सभी को स्थिर एवं 'सावधान' मुद्रा में रहना अनिवार्य होता है। - ध्वज की अमान्यता: राष्ट्रीय ध्वज को फहराते समय किसी भी प्रकार की हड़बड़ी, खींचतान या उसे उलझा हुआ छोड़ना उसकी गरिमा के प्रतिकूल माना जाता है।
जनता व स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवाल
समारोह में हुई इस बड़ी प्रशासनिक व नैतिक चूक के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह केवल आयोजकों की लापरवाही थी या ध्वज संहिता का सीधा उल्लंघन?
भले ही आयोजकों की ओर से इसे अनजाने में हुई तकनीकी अव्यवस्था कहा जाए, लेकिन राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान से जुड़े नियमों में किसी भी तरह की लापरवाही को संवैधानिक रूप से अनुचित माना जाता है।